पटना (बिहार)। राजधानी पटना के ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘स्पोर्टस्टार कॉन्क्लेव: फोकस बिहार’ ने भारतीय खेलों के भविष्य को लेकर एक व्यापक और दूरदर्शी चर्चा का मंच प्रदान किया। इस कॉन्क्लेव में 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए खेल नीतियों, बुनियादी ढांचे, प्रतिभा विकास और स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ।
स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग पर उठे सवाल
कॉन्क्लेव में खेल उपकरण निर्माण की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया गया।
लक्षिता मेहरोत्रा ने बताया कि भारत में उत्पादन लागत अधिक होने के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कठिनाई आती है।
कच्चे माल, मशीनरी और लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत को प्रमुख बाधा बताया गया।
शिव प्रकाश सिंह (शिव नरेश स्पोर्ट्स) ने सरकारी खरीद में विदेशी ब्रांड्स को प्राथमिकता मिलने पर चिंता जताई।
मुख्य सुझाव:
घरेलू उद्योग को बढ़ावा देकर भारत को स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जाए।
स्थानीय ब्रांड्स को प्रोत्साहन देकर ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत किया जाए।
खेल प्रशासन में सुधार की आवश्यकता
बॉक्सिंग इंडिया के सचिव प्रमोद कुमार ने चयन प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
एथलीट-केन्द्रित निर्णय लेने और जमीनी स्तर पर सुधार की जरूरत बताई।
वहीं, एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने सकारात्मक बदलावों की ओर इशारा करते हुए कहा:
पिछले 15 वर्षों में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिली हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार हुआ है।
मेजबानी बनाम प्रदर्शन: यथार्थ की तस्वीर
राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक विजेता जॉयदीप कर्मकार ने कहा कि मेजबानी से पदकों में 25–50% तक वृद्धि संभव है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
गुणवत्ता सुधार और प्रदर्शन दर (Improvement Rate) पर विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई गई।
हाई-प्रायोरिटी खेलों पर फोकस का सुझाव
दानी स्पोर्ट्स फाउंडेशन के राजेश राजगोपालन ने रणनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया:
सभी खेलों पर समान ध्यान देने के बजाय चुनिंदा खेलों पर फोकस किया जाए।
प्राथमिक खेल:
तैराकी
तलवारबाजी
जूडो
साइकिलिंग
ग्रासरूट से ओलंपिक तक का रोडमैप
डोला बनर्जी ने स्कूल स्तर पर खेलों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
10 वर्ष की उम्र से प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण शुरू करने की बात कही।
दीप्ति बोपैया ने पैरालिंपिक खेलों में भारत की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए कहा:
2036 तक भारत 100 पदकों का आंकड़ा हासिल कर सकता है।
निष्कर्ष
पटना स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव 2026 केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं रहा, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश भी लेकर आया—
यदि 2036 ओलंपिक में भारत को शीर्ष देशों में स्थान बनाना है, तो आज से ही योजनाबद्ध, केंद्रित और समन्वित प्रयास शुरू करने होंगे।
यह आयोजन बिहार और देश के खेल तंत्र के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ साबित हुआ, जहां भविष्य की नींव रखने की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया।


