पांच टूर्नामेंट, पांच मेडल… फिर भी कोच पद से बाहर हुए
नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व दिग्गज गोलकीपर P. R. Sreejesh ने जूनियर पुरुष हॉकी टीम के कोच पद से हटाए जाने के बाद हॉकी इंडिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। श्रीजेश ने आरोप लगाया कि भारतीय कोचों की तुलना में विदेशी कोचों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। हालांकि, Hockey India ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।
श्रीजेश ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि उनके लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल में जूनियर टीम ने पांच अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेेले और सभी में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। इसके बावजूद उनके अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि टीम के लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद भी उन्हें हटाया जाना निराशाजनक है।
भारतीय हॉकी के सबसे सफल गोलकीपरों में गिने जाने वाले श्रीजेश ने अपने संदेश में संकेत दिए कि भारतीय कोचों को पर्याप्त सम्मान और अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अच्छे परिणाम देने के बाद भी किसी को हटाया जाता है, तो यह खिलाड़ियों और कोचों दोनों के लिए गलत संदेश है।
दूसरी ओर, हॉकी इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि कोचिंग नियुक्तियों और बदलावों का फैसला पूरी तरह पेशेवर प्रक्रिया के तहत किया जाता है। संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी कोच को प्राथमिकता देने जैसी बातों में कोई सच्चाई नहीं है। हॉकी इंडिया के अनुसार टीम और खिलाड़ियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लिए जाते हैं।
श्रीजेश भारतीय हॉकी के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ियों में रहे हैं और उनकी अगुवाई में भारत ने कई ऐतिहासिक सफलताएं हासिल कीं। कोच के रूप में भी उनके कार्यकाल में जूनियर टीम का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा, इसलिए उनके हटाए जाने को लेकर खेल जगत में चर्चा तेज हो गई है।
श्रीजेश विदेशी कोच को प्राथमिकता देने के आरोप पर हॉकी इंडिया का खंडन
15
May