नई दिल्ली। भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने आयु धोखाधड़ी के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए पांच पहलवानों को चार वर्षों के लिए निलंबित कर दिया है। जांच में इन खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। इसके साथ ही महासंघ ने रेफरी आयोग के सदस्य जयबीर को हितों के टकराव के आरोप में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय कुमार सिंह के आदेश के अनुसार निलंबित किए गए पहलवानों में दीपांशु, तनुज अंतिल, बलजोत सिंह, निखिल दलाल और साकेत ड्राल शामिल हैं। महासंघ ने बताया कि हाल के महीनों में कई खिलाड़ियों के दस्तावेजों में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद विस्तृत जांच कराई गई।
बुधवार को आयोजित अंडर-20 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप ट्रायल में पुरुष फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग के विजेता दीपांशु का जन्म प्रमाण पत्र भी जांच में फर्जी पाया गया। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह पवन बालाजी धायगुड़े को टीम में शामिल किया गया। अंडर-20 एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 27 जून से थाईलैंड के पटाया में आयोजित होगी।
इसी तरह 86 किलोग्राम वर्ग में ट्रायल के फाइनल तक पहुंचे साकेत ड्राल को भी फर्जी दस्तावेज मामले में कार्रवाई का सामना करना पड़ा। उन्हें फाइनल मुकाबले से हटा दिया गया, जिसके बाद साहिल दलाल को मौका मिला और उन्होंने भारतीय टीम में अपना स्थान सुनिश्चित किया।
महासंघ के अनुसार, चंडीगढ़ नगर निगम के जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रार कार्यालय से सत्यापन के दौरान पाया गया कि संबंधित खिलाड़ियों द्वारा जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्रों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए डब्ल्यूएफआई ने सभी पांचों पहलवानों को तत्काल प्रभाव से चार वर्षों के लिए सभी कुश्ती गतिविधियों से निलंबित कर दिया है।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में पांच पहलवान चार साल के लिए निलंबित
06
Jun