वनखंडेश्वर विद्यापीठ, धनसुला में देशभर के शिक्षाविदों व विशेषज्ञों ने शिक्षा और संस्थागत विकास पर रखे विचार
मुरैना। वनखंडेश्वर विद्यापीठ, धनसुला में आयोजित चिंतन बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, इतिहासकारों, पत्रकारों, कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा ऐतिहासिक शिक्षण संस्थानों के संरक्षण पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संस्था की मजबूती उसके पवित्र उद्देश्य, पारदर्शी कार्यशैली और समाज के सहयोग पर निर्भर करती है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पुरानी और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं को अपने गौरवशाली इतिहास का संरक्षण करना चाहिए तथा समय-समय पर समाज के सामने उसे प्रस्तुत करना चाहिए। साथ ही रचनात्मक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बौद्धिक संवादों के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ने की आवश्यकता बताई गई।
[news_related_post]कार्यक्रम के दौरान विद्यापीठ में नए घंटे का लोकार्पण भी किया गया। कई अतिथियों ने संस्थान के विकास और संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा संस्थानों के सफल संचालन के लिए पारदर्शिता, लोकतांत्रिक व्यवस्था, समावेशी सोच और समर्पित नेतृत्व आवश्यक है। संस्थाओं को केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विमर्श के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना चाहिए।
बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, पूर्व विद्यार्थियों और विशेषज्ञों को संरक्षक मंडल से जोड़कर संस्थानों को दीर्घकालिक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। वक्ताओं ने अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित करने और शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक पहल करने वालों का मनोबल बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता जयंत सिंह तोमर ने किया, जबकि अंत में प्राचार्य मुनेन्द्र सेंगर ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
यह संस्करण मूल समाचार की जानकारी को नए शब्दों और नए ढंग से प्रस्तुत करता है, जिससे कॉपीराइट उल्लंघन का जोखिम कम होता है।