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विश्व कप में मां की विरासत को आगे बढ़ाएंगे यशदीप सिवाच

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1998 में मां प्रीतम रानी सिवाच ने नीदरलैंड में खेला था विश्व कप, अब लगभग तीन दशक बाद बेटा उसी धरती पर करेगा भारत का प्रतिनिधित्व।

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नई दिल्ली। भारतीय हॉकी के इतिहास में पहली बार मां और बेटे की जोड़ी विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अनूठा गौरव हासिल करने जा रही है। पूर्व भारतीय महिला हॉकी कप्तान प्रीतम रानी सिवाच ने वर्ष 1998 में नीदरलैंड में आयोजित विश्व कप में भारत की ओर से खेला था। अब उनके बेटे यशदीप सिवाच 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उसी विरासत को आगे बढ़ाएंगे।

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26 वर्षीय डिफेंडर यशदीप ने बताया कि विश्व कप टीम में चयन की खबर सबसे पहले उन्होंने अपनी मां को दी। यह पल उनके परिवार के लिए बेहद भावुक था, क्योंकि उनकी मां भी इसी देश में विश्व कप खेल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि उसी मंच और उसी देश में भारत की जर्सी पहनना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है।

प्रीतम रानी सिवाच 2002 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य भी रही हैं। बचपन से यशदीप अपनी मां की हॉकी से जुड़ी तस्वीरें, विश्व कप की यादें और टीम एल्बम देखते रहे, जिसने उन्हें इस खेल की ओर प्रेरित किया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और 2010 हॉकी विश्व कप को भी अपने माता-पिता के साथ देखा था।

यशदीप का कहना है कि राष्ट्रीय टीम में शामिल होने के बाद उन्हें अपनी मां की मेहनत, अनुशासन और लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर खेलने के लिए किए गए संघर्ष का वास्तविक महत्व समझ आया। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन बनाए रखना आसान नहीं होता।

हॉकी सिवाच परिवार की पहचान बन चुकी है। यशदीप के पिता कुलदीप सिवाच भी पूर्व हॉकी खिलाड़ी और प्रतिष्ठित कोच हैं। वे हरियाणा में प्रीतम सिवाच के साथ हॉकी अकादमी का संचालन करते हैं। उनकी बहन कनिका सिवाच भी जूनियर स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और सीनियर टीम में जगह बनाने की दावेदार हैं।

यशदीप ने कहा कि उनका सपना विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर अपने माता-पिता के अधूरे सपनों को पूरा करना है और अपनी बहन के लिए प्रेरणा बनना है। उन्होंने बताया कि परिवार में मां और बहन फॉरवर्ड खिलाड़ी रही हैं, जबकि उन्हें डिफेंडर की भूमिका अधिक पसंद है। गोल करने से ज्यादा उन्हें विरोधी टीम के गोल रोकने और टीम की रक्षा करने में आनंद मिलता है।

ऑस्ट्रेलिया में क्लब हॉकी खेलने का अनुभव रखने वाले यशदीप ने कहा कि वे विश्व कप को लेकर किसी दबाव में नहीं हैं। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन और वरिष्ठ खिलाड़ियों ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपना स्वाभाविक खेल खेलने की सलाह दी है। उनका मानना है कि वे अपनी मां की उपलब्धियों पर गर्व करते हैं, लेकिन भविष्य में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं, ताकि लोग उनकी मां को “यशदीप सिवाच की मां” के रूप में भी पहचानें।

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