नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेटर सारांश जैन के लिए राष्ट्रीय टेस्ट टीम में चयन केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके परिवार के वर्षों पुराने सपने के पूरा होने का क्षण बन गया। 33 वर्षीय खिलाड़ी को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया गया, जिससे उनके पिता और पूर्व क्रिकेटर सुबोध जैन का सपना भी साकार हो गया।
करीब एक दशक पहले, जब सारांश ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे, उसी दौरान उनके पिता को मुंह के कैंसर का पता चला। सर्जरी के बाद बोलने में असमर्थ सुबोध जैन ने कागज पर लिखकर बेटे का हौसला बढ़ाया था कि यदि वह अच्छा खेलेगा, तो उन्हें भी जल्द ठीक होने की ताकत मिलेगी। यह संदेश सारांश के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बन गया।
भारतीय टीम में चयन की खबर मिलने के समय सारांश हनुमान मंदिर में पूजा कर रहे थे। बाहर आने पर उन्हें अपने चयन की जानकारी मिली। इस सफलता से पूरा परिवार भावुक हो गया और वर्षों की मेहनत रंग लाई।
[news_related_post]मध्य प्रदेश के लिए रणजी क्रिकेट खेल चुके सुबोध जैन ने बताया कि वे स्वयं भारत के लिए खेलने का सपना पूरा नहीं कर सके थे, लेकिन बेटे ने उनकी अधूरी इच्छा पूरी कर दी। उन्होंने बचपन से ही सारांश की प्रतिभा को पहचान लिया था और शुरुआती दिनों में स्वयं उन्हें प्रशिक्षण दिया।
सारांश का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा। रणजी ट्रॉफी में शानदार शुरुआत के बावजूद उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। घरेलू क्रिकेट, दलीप ट्रॉफी और ईरानी कप में बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने चयनकर्ताओं का विश्वास जीता और आखिरकार भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बना ली।