नई दिल्ली। भारत में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने वाली व्यवस्था में कई सुधारों की जरूरत है। देश में खेलों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है, ऐसे में सरकार और खेल संस्थाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा।
ग्रामीण और छोटे शहरों में अनेक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अच्छे मैदान, प्रशिक्षक और जरूरी खेल उपकरण आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। इसके अलावा खिलाड़ियों की तैयारी में आधुनिक कोचिंग, पोषण, फिटनेस और खेल विज्ञान जैसी सुविधाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
खेल संगठनों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना भी जरूरी है। खिलाड़ियों के चयन में किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। खेल प्रशासन में अनुभवी खिलाड़ियों और विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ाकर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
[news_related_post]खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं से कुछ समय पहले नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर खेल केंद्रों को मजबूत करना तथा प्रतिभाओं की पहचान के लिए निष्पक्ष व्यवस्था बनाना जरूरी है।
‘खेलो इंडिया’ जैसे अभियानों का लाभ देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। साथ ही सरकार और निजी संस्थाओं के सहयोग से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
भारत को खेलों में बड़ी ताकत बनाने के लिए केवल पदक जीतने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ऐसा मजबूत खेल तंत्र तैयार करना होगा जिसमें प्रतिभा को सही समय पर पहचान मिले, खिलाड़ियों को लगातार सुविधाएं मिलें और पूरी व्यवस्था उनकी सफलता में सहयोगी बने।