विकेंद्रीकृत मॉडल की ओर बढ़ता भारतीय शतरंज, छत्तीसगढ़ बना राष्ट्रीय विकास का आदर्श
रायपुर। भारत में शतरंज का स्वरूप अब केवल केंद्रीय ढांचे तक सीमित न रहकर राज्यों के सशक्त योगदान से आगे बढ़ रहा है। इसी बदलाव की कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य शतरंज संघ (CGSCA) ने संगठनात्मक मजबूती, प्रतिभा संवर्धन और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में एक प्रभावशाली उदाहरण प्रस्तुत किया है।

इस परिवर्तन की नींव अखिल भारतीय शतरंज महासंघ (AICF) के उपाध्यक्ष एवं CGSCA के अध्यक्ष राघवेन्द्र सिंघानिया की दूरदृष्टि और रणनीतिक नेतृत्व से पड़ी। मार्च 2024 में संपन्न AICF चुनावों के बाद अध्यक्ष नितिन नारंग और सचिव देव ए. पटेल के नेतृत्व में शुरू हुए नए प्रशासनिक दौर में छत्तीसगढ़ में शतरंज विकास के लिए एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना लागू की गई।
FIDE-रेटेड चयन प्रणाली से खिलाड़ियों को वैश्विक पहचान
CGSCA ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि आयु-वर्ग राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के सभी चयन टूर्नामेंट अनिवार्य रूप से FIDE-रेटेड होंगे, जिससे खिलाड़ियों की रेटिंग अंतरराष्ट्रीय ELO प्रणाली में दर्ज हो सके।
वर्ष 2025–26 के दौरान भिलाई, बेमेतरा, कोरबा के साथ-साथ बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे क्षेत्रों में रेटेड प्रतियोगिताओं का आयोजन कर क्षेत्रीय असंतुलन को काफी हद तक समाप्त किया गया।
वर्ष 2025 की अंडर-13 राज्य चयन प्रतियोगिता का आयोजन बेमेतरा स्थित एकेडमिक वर्ल्ड स्कूल में हुआ, जिसमें पंडरिया विधायक एवं CGSCA की उपाध्यक्ष भावना बोहरा का विशेष सहयोग रहा। इस प्रतियोगिता से कई खिलाड़ियों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय रेटिंग प्राप्त करने का अवसर मिला।
इसी क्रम में ‘चेस इन स्कूल्स’ पहल को राज्य शासन का समर्थन मिला, जिससे ग्रामीण और आदिवासी अंचलों तक शतरंज की पहुँच सुनिश्चित हुई।
ग्रैंडमास्टर कोचिंग से तकनीकी स्तर में उछाल
11 से 17 सितंबर 2025 तक रायपुर में आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर में ग्रैंडमास्टर प्रवीण थिप्से के नेतृत्व में राज्य के 20 चयनित खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस शिविर में फिडे इंस्ट्रक्टर एवं कैंडिडेट मास्टर रवि कुमार तथा इंटरनेशनल मास्टर अनुप देशमुख ने भी खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया।
ग्रैंडमास्टर थिप्से की उपस्थिति में श्री सिंघानिया ने उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से शतरंज को शिक्षा और खेल नीति में शामिल करने को लेकर सार्थक संवाद स्थापित किया।
आर्बिटर विकास में ऐतिहासिक उपलब्धि
छत्तीसगढ़ शतरंज के इतिहास में यह वर्ष विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जब एक ही वित्तीय वर्ष में इंटरनेशनल आर्बिटर्स की संख्या में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।
जहाँ पहले राज्य में केवल तीन इंटरनेशनल आर्बिटर्स कार्यरत थे, वहीं अब रॉकी देवांगन, एएफएम हर्ष शर्मा और एआईएम शुभम बसोने ने इस प्रतिष्ठित उपाधि को प्राप्त कर राज्य को नई पहचान दिलाई।
इसके अतिरिक्त रायपुर में सीनियर नेशनल आर्बिटर सेमिनार और प्रमाणन कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 50 से अधिक प्रशिक्षित आर्बिटर्स तैयार हुए। इस उपलब्धि में साउथ एशियन चेस काउंसिल के अध्यक्ष एवं AICF कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार का मार्गदर्शन अहम रहा।
संरचित और प्रेरणादायक मॉडल
जिला इकाइयों, प्रशिक्षकों, आर्बिटर्स और संघ के सामूहिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ शतरंज आज एक पारदर्शी, संगठित और विकासोन्मुख मॉडल के रूप में उभर रहा है। राघवेन्द्र सिंघानिया के नेतृत्व में राज्य शतरंज निरंतर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।