INTERNATIONAL, फ़ुटबॉल

ईरान ने फीफा को दी चेतावनी, सम्मान नहीं तो वर्ल्ड कप से हटने पर विचार

ईरानी फुटबॉल जगत इस समय बड़े राजनीतिक और खेल विवाद के बीच खड़ा है। ईरान फुटबॉल महासंघ (FFIRI) के अध्यक्ष मेहदी ताज ने फीफा के सामने साफ शब्दों में अपनी बात रखते हुए कहा है कि यदि ईरान के सम्मान और उसकी संस्थाओं की गरिमा की रक्षा नहीं की गई, तो देश वर्ल्ड कप से हटने जैसे बड़े फैसले पर भी विचार कर सकता है।
विवाद की जड़ कनाडा का वह फैसला बना, जिसमें वर्ल्ड कप के सह-मेजबान देश ने मेहदी ताज को अपने यहां प्रवेश देने से इनकार कर दिया। कनाडा सरकार का आरोप है कि ताज के संबंध इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से हैं, जिसे अमेरिका और कनाडा दोनों ‘आतंकी संगठन’ मानते हैं। इस घटनाक्रम के बाद ईरान और फीफा के बीच तनाव बढ़ गया है।
बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में मेहदी ताज और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो के बीच अहम बैठक होगी, जिसमें ईरानी प्रतिनिधियों और खिलाड़ियों के सम्मान, सुरक्षा और व्यवहार को लेकर चर्चा की जाएगी। तेहरान में सरकारी मीडिया से बातचीत में ताज ने कहा कि किसी भी कीमत पर उनके देश के स्तंभों का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि यदि खिलाड़ियों से राजनीतिक या अपमानजनक सवाल पूछे गए, तो ईरान टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने का फैसला भी कर सकता है।
इस मुद्दे पर ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी फुटबॉल महासंघ का समर्थन किया है। मंत्रालय का कहना है कि वर्ल्ड कप जैसे वैश्विक आयोजन में वीजा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना मेजबान देशों और फीफा की जिम्मेदारी है, और इसमें राजनीति का दखल नहीं होना चाहिए।
राजनीतिक तनाव के बीच ईरानी टीम अपनी तैयारियों में भी जुटी हुई है। मुख्य कोच अमीर घलेनोई जल्द ही 30 सदस्यीय संभावित टीम की घोषणा करेंगे, जिसे बाद में घटाकर 26 खिलाड़ियों तक सीमित किया जाएगा। टीम 16 मई को तुर्की के ट्रेनिंग कैंप के लिए रवाना होगी और वहां से वर्ल्ड कप शुरू होने से लगभग 14 दिन पहले अमेरिका पहुंचेगी।
हालांकि, मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और राजनीतिक हालात के कारण ईरान को अभ्यास मैच आयोजित करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई देशों ने अंतिम समय में ईरान के साथ खेलने से इनकार कर दिया है। फिलहाल टीम मिल्ली का पहला मुकाबला 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ तय है, लेकिन बढ़ती अनिश्चितताओं ने पूरे अभियान पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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