भारतीय महिला हॉकी टीम एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के इरादे से ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए तैयार है। 21 मई से 3 जून तक होने वाली चार मैचों की इस अहम सीरीज में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया की मजबूत चुनौती का सामना करेगी। यह दौरा केवल एक द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं, बल्कि अगले महीने न्यूजीलैंड में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित एफआईएच नेशंस कप की तैयारियों का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है।
भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट बेहद अहम है, क्योंकि नेशंस कप का खिताब ही एफआईएच प्रो लीग में वापसी का रास्ता खोल सकता है। पिछले वर्ष प्रो लीग से बाहर होने के बाद टीम इंडिया के सामने अब खुद को फिर से साबित करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में पर्थ की धरती पर होने वाले मुकाबले खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और रणनीति दोनों की असली परीक्षा साबित होंगे।
हाल ही में अर्जेंटीना दौरे पर भारतीय टीम ने आक्रामक और संतुलित खेल दिखाकर शानदार प्रदर्शन किया था, जिससे खिलाड़ियों का मनोबल काफी ऊंचा है। इसी आत्मविश्वास को और मजबूत करने के लिए बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय शिविर में टीम ने कड़ी मेहनत की। फिटनेस, गति और सामंजस्य के साथ-साथ टीम ने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी मानी जा रही ड्रैग-फ्लिकिंग पर विशेष ध्यान दिया। इसके लिए नीदरलैंड के प्रसिद्ध विशेषज्ञ ताके ताकेमा की देखरेख में खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
मुख्य कोच शुअर्ड मारिने का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ खेलने से खिलाड़ियों को अपनी वास्तविक स्थिति समझने का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार यह सीरीज टीम की रणनीति, डिफेंस और पेनाल्टी कॉर्नर कन्वर्जन को परखने का बेहतरीन मंच होगी।
पर्थ हॉकी स्टेडियम में होने वाले ये मुकाबले भारतीय टीम के लिए आसान नहीं होंगे, लेकिन युवा जोश और अनुभव के दम पर भारतीय बेटियां कंगारुओं को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अब देशवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारतीय महिला हॉकी टीम इस अग्निपरीक्षा को सफलतापूर्वक पार कर प्रो लीग में वापसी की मजबूत नींव रख पाएगी।
नेशंस कप से पहले कंगारुओं से टकराएंगी भारतीय बेटियां
16
May