नई दिल्ली। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों के शुरू होने से पहले भारतीय एथलेटिक्स को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) की उपाध्यक्ष और विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता अंजू बॉबी जॉर्ज का मानना है कि इस बार भारतीय एथलीट पिछले संस्करण के प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर नतीजे देने में सक्षम हैं।
अंजू बॉबी जॉर्ज ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में भारतीय एथलेटिक्स ने लगातार प्रगति की है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारियों का लाभ मिला है, जिससे अब भारत कई स्पर्धाओं में मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। उनके अनुसार यह सफलता किसी एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि लंबे समय से किए जा रहे सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में खिलाड़ियों को अपनी जरूरत के अनुसार कोच और प्रशिक्षण केंद्र चुनने की सुविधा मिल रही है। आवश्यकता पड़ने पर विदेशी प्रशिक्षण शिविरों का भी सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है।
[news_related_post]अंजू के मुताबिक इस बार भारत के पास कई संभावित पदक विजेता हैं। नीरज चोपड़ा, मुरली श्रीशंकर, सर्वेश कुशारे, गुरिंदरवीर सिंह और पारुल चौधरी जैसे खिलाड़ी शानदार लय में हैं और उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछली बार चोट के कारण नीरज राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले सके थे, लेकिन इस बार उनकी मौजूदगी भारतीय दल की सबसे बड़ी ताकत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल एक-दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है। कई स्पर्धाओं में भारतीय एथलीट विश्व स्तर पर पदक जीतने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुसार खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) जैसी योजनाओं ने नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
2030 राष्ट्रमंडल खेलों की संभावित मेजबानी और 2036 ओलंपिक की तैयारियों पर बोलते हुए अंजू ने कहा कि बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी भारत के खेल ढांचे को और मजबूत करेगी। इससे खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय वातावरण में प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा और भविष्य की तैयारियों को नई दिशा मिलेगी।
नीरज चोपड़ा और पाकिस्तान के अरशद नदीम के बीच होने वाली संभावित भिड़ंत पर उन्होंने कहा कि दुनिया इस मुकाबले का इंतजार कर रही है। हालांकि इसे खेल भावना के साथ देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि भाला फेंक स्पर्धा में भारत के पास एक से अधिक पदक जीतने की क्षमता है और रोहित यादव भी मजबूत चुनौती पेश कर सकते हैं।