दुनिया का सबसे बड़ा मंच **
भारतीय खेलों के इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जुड़ने जा रहा है क्योंकि भारत अब विश्व इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2028 की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ऐतिहासिक फैसला गुरुवार को पोलैंड के टोरून में आयोजित विश्व इंडोर एथलेटिक्स काउंसिल की बैठक में लिया गया, जिससे खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है। विश्व एथलेटिक्स के उपाध्यक्ष आदिल सुमरीवाला और एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के अध्यक्ष बहादुर सिंह सग्गू ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि साल 2028 में दुनिया भर के दिग्गज एथलीट भुवनेश्वर के कलिंगा इंडोर स्टेडियम में अपनी चमक बिखेरेंगे।
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ ने इसी साल की शुरुआत में इस प्रतिष्ठित आयोजन के लिए अपनी दावेदारी मजबूती से पेश की थी। जनवरी में विश्व एथलेटिक्स की दो सदस्यीय टीम ने भुवनेश्वर का दौरा कर वहां की अत्याधुनिक इंडोर सुविधाओं का बारीकी से निरीक्षण किया था, जिसके बाद भारत की मेजबानी पर मुहर लगी। भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का एक बड़ा मौका है, क्योंकि इससे पहले देश ने साल 2004 में नई दिल्ली में विश्व हाफ मैराथन की सफल मेजबानी की थी। अब 24 साल बाद एथलेटिक्स का इतना बड़ा महाकुंभ भारतीय सरजमीं पर वापस लौट रहा है।
[news_related_post]ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर अब देश में ट्रैक एंड फील्ड खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुकी है। कलिंगा स्टेडियम न केवल घरेलू प्रतियोगिताओं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं का भी गवाह बनता रहा है। 2017 में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप की सफल मेजबानी से लेकर पिछले साल आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर तक, ओडिशा ने हर बार अपनी काबिलियत साबित की है।
दिलचस्प बात यह है कि आगामी 24 और 25 मार्च को पहली राष्ट्रीय इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप भी इसी कलिंगा इंडोर स्टेडियम में आयोजित होने जा रही है, जो 2028 के विश्व कप के लिए एक शानदार पूर्वाभ्यास साबित होगी।
देखा जाए तो विश्व पटल पर भारतीय एथलेटिक्स का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा के ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप के पदकों ने भारतीय खिलाड़ियों में एक नया आत्मविश्वास भरा है। वहीं अविनाश साबले और गुलवीर सिंह जैसे एथलीटों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन कर यह साबित कर दिया है कि भारतीय एथलीट अब किसी से कम नहीं हैं। गुलवीर सिंह का न्यूयॉर्क में 60 मिनट से कम समय में हाफ-मैराथन पूरी करना भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत का ताजा उदाहरण है।
ऐसे में 2028 की यह मेजबानी न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूती देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगी।