Uttar Pradesh

आगरा की माटी का ‘गुरखी गोला’ अब वैश्विक पटल पर: ‘डायमंड बॉल’ के रूप में हुआ पुनर्जन्म ताजनगरी से ओलंपिक के सफर की शुरुआत; 15 अक्टूबर को मनाया जाएगा ‘विश्व डायमंड बॉल दिवस’

आगरा। ताजनगरी आगरा अब केवल अपनी ऐतिहासिक विरासतों के लिए ही नहीं, बल्कि खेल की दुनिया में अपनी एक नई और अनूठी पहचान ‘डायमंड बॉल’ (स्वदेशी नाम: गुरखी गोला) के लिए भी जानी जाएगी। आगरा की तहसील सैया के गाँव सोरा की गलियों से निकले इस 75 वर्ष पुराने पारंपरिक खेल को आधुनिक और वैज्ञानिक स्वरूप देकर ‘डायमंड बॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ द्वारा वैश्विक स्तर पर लॉन्च कर दिया गया है।
इतिहास और पुनर्जीवन: स्वदेशी से वैश्विक तक
खेल के जनक और वर्ल्ड डायमंड बॉल के फाउंडर, राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्री राजीव सोई ने बताया कि यह खेल मूल रूप से ‘गुरखी गोला’ के नाम से गाँव-देहात में लोकप्रिय था। दिलीप शर्मा जी के पिता द्वारा उनके गांव ओर उसके आस पास के गांवों में खेले जाने वाले इस पारंपरिक खेल को आधुनिक चकाचौंध के बीच लुप्त होने से बचाने के लिए इसे एक नया स्वरूप दिया गया है। श्री राजीव सोई ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वदेशी खेलों को बढ़ावा देने’ के आह्वान से प्रेरित होकर इस खेल को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला गया है।
आधुनिक स्वरूप और नियम तकनीकी अधिकारी डॉ. देशदीपक कुलश्रेष्ठ के अनुसार, खेल को अब वैज्ञानिक आधार पर विकसित किया गया है:
मैदान का आकार: 34×22 मीटर।
अवधि: 10-10 मिनट के 4 क्वार्टर।
खिलाड़ी: मैदान में 7-7 खिलाड़ियों की दो टीमें।
उपकरण: पुराने लकड़ी के बॉक्स की जगह अब ‘डायमंड रिंग पोल’ का उपयोग होता है।
बलूनी स्कूल ऑफ कॉम्पटीशन में हुआ भव्य डेमोंस्ट्रेशन मैच अखिल भारतीय प्रचार-प्रसार के तहत बलूनी स्कूल ऑफ कॉम्पटीशन में एक प्रदर्शनी मैच का आयोजन किया गया। जिसमें 10 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, एवं यूथ इंटर डिस्ट्रिक्ट डायमंड बॉल प्रतियोगिता में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद लखनऊ राजकीय इंटर कॉलेज आगरा सेंट गोपालदास स्कूल आदि टीमों के 200 खिलाड़ी ओर कोचों ने प्रतिभाग किया ओर इंटर-डिस्ट्रिक्ट प्रतियोगिता में राजकीय इंटर कॉलेज आगरा (बालक वर्ग) और मथुरा (बालिका वर्ग) की टीमें विजेता रहीं।

आगामी योजनाएं और पंजीकरण
एसोसिएशन के महासचिव श्री दिलीप शर्मा ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि ‘डायमंड बॉल एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ को 30 अप्रैल 2026 को ‘अंडर सोसायटी एक्ट 1860’ के तहत आधिकारिक पंजीकरण प्राप्त हो गया है।
राष्ट्रीय प्रतियोगिता: आगामी जून माह में पहली राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
प्रशिक्षण: जल्द ही खेल के कोचों के लिए प्रशिक्षक परीक्षाएँ आयोजित होंगी।

विश्व दिवस: कोषाध्यक्ष चौधरी एम.डी. अहमद खान ने घोषणा की कि हर साल 15 अक्टूबर को ‘विश्व डायमंड बॉल दिवस’ एवं उसके स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

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नारा और संकल्प
“खेल पुराना, अंदाज नया” और “तन स्वदेशी, मन स्वदेशी, तो फिर क्यों न खेलें खेल स्वदेशी” के नारों के साथ इस खेल का उद्देश्य आगरा को ‘डायमंड बॉल’ के उद्भव स्थल के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित करना है। संघ के पदाधिकारियों ने संकल्प लिया है कि इस माटी के खेल को जल्द ही ओलंपिक के मंच तक पहुँचाया जाएगा।

धर्मेंद्र बघेल , संजय नेहरू, संतोष कुमार, जेवियर मिरिंडा तरुण चतुर्वेदी, आदि ने आगरा की विरासत ओर स्वदेशी खेल की संस्कृति को बचाने पर संघ द्वारा सराहनीय कार्य की सराहना करते हुए बधाई दी।

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